क्या मनसुख हत्या की साजिश में मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह भी शामिल? NIA ने चार्जशीट में जोड़े कई सबूत

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मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह पर एंटीलिया कांड और मनसुख हत्या की साजिश से जुड़ा होने का शक और भी गहराता जा रहा है. हालांकि एनआईए ने अपनी चार्जशीट में परमबीर सिंह का सीधे तौर से नाम नहीं लिया है लेकिन कई ऐसी सबूतों को जोड़ा है जो उन्हें शक के घेरे में खड़ा कर रहा है. सिंह पर अब आरोप लग रहा है कि वो शायद से फेसटाईम आईडी का इस्तेमाल कर इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों के संपर्क में थे. उस फेसटाइम आईडी का पहला नाम कुरकुरे और आखिरी नाम बालाजी था.

जांच के दौरान एनआईए को एक गूगल अकाउंट के बारे में जानकारी मिली, जिसका इस्तेमाल फेसटाइम चलाने के लिए किया गया था. और उसी फेसटाइम आईडी का इस्तेमाल आरोपियों से बातचीत के लिए भी किया गया था.

एनआईए के सूत्रों के अनुसार, इस गूगल अकाउंट (ISE####@gmail.com) का इस्तेमाल कर फेसटाइम चलाया जा रहा था. इस अकाउंट से किसका फोन जुड़ा है और उसका नाम क्या है यह पता लगाने के लिए ऐपल कंपनी की लीगल टीम से संपर्क किया था. उसके जवाब में एनआईए को जो पता चला वही बात उन्हें परमबीर के सबसे करीबी अधिकारी के भी बयान में सामने आयी थी. दोनों के बयान में जो एक नाम सामने आया उसके बाद से ही परमबीर पर शक और भी गहराता नजर आने लगा है.

परमबीर के करीबी अधिकारी ने एनआईए को अपना बयान दिया था. उसी बयान के एक हिस्से में उन्होंने बताया कि जब परमबीर होम हार्ड के डीजी बनाए गए थे तब उन्होंने मुझे बोला कि उन्हें एक सेकंड हैंड आइफोन लेना है जिसके बाद मैंने सिताबे खान नाम के शख़्स को बुलाया. उसे हम पहचानते हैं वो अपने साथ 3 से 4 मोबाइल फोन लाया और कुछ समय बाद वो परमबीर के चेंबर से बाहर आकर मुझे बताया कि सर को एक आइफोन मोबाइल पसंद आ गया तो उन्होंने ले लिया.

खान ने आगे बताया कि अंदर नेटवर्क का प्रॉब्लम है इस वजह से वो बाहर आया और मुझे फोन दिया. जिसके बाद मैंने आईडी के लिए पहला नाम कुरकुरे और आखिरी नाम बालाजी रख दिया. ऐसा इसलिए किया क्योंकि जिस समय यह हो रहा था मेरे सामने बालाजी कुरकुरे रखा हुआ था तो नाम याद रहे इस वजह से मैंने यह नाम लिख दिया और पासवर्ड भी डाल दिया. लेकिन मुझे इस समय वो पासवर्ड याद नहीं है.

एक और आरोपी की तलाश में एनआईए
एनआईए जब अपनी जांच में आगे बढ़ रही थी तभी उन्हें एक ऐसा ईमेल आईडी मिला था और एनआईए को शक था कि इसका इस्तेमाल आरोपियों के साथ बातचीत करने के लिए किया का रहा था. इसी शक के बिनाह पर एनआईए ने एपल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को 8 जुलाई को ईमेल लिखा था. एपल ने 20 जुलाई को एनआईए को एक जानकारी दी जिसने चौका दिया. एपल ने बताया कि जिस ईमेल आईडी की वो बात कर रहे हैं उसका पहला नाम कुरकुरे और आखिरी नाम बालाजी है. इसे पढ़ने के बाद एनआईए को परमबीर के करीबी अधिकारी के बयान की लाइन याद आ गई जिसके उसने कुरकुरे और बालाजी नाम का जिक्र किया था.

हालांकि उस बयान में अधिकारी ने p###@hotmail.com और p####@gmail.com इन दो ईमेल आईडी का जिक्र किया था ना कि ise####@gmail.com . जिसका इस्तेमाल आरोपियों से बात करने के लिए किया गया था. सूत्रों को माने, कुछ इन्हीं सबूतों के आधार पर परमबीर शक के दायरे में है और कुछ और सबूतों के अभाव में उनका नाम चार्जशीट में बतौर सस्पेक्ट या आरोपी के रूप में नहीं है. इस मामले में हमने परमबीर सिंह से बातचीत करने की कोशिश की पर उनका मोबाइल फोन बंद है.

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