छत्तीसगढ़ के इस जिले के लोगों को हुई यह बीमारी, सरकार से मांगी इच्छा मृत्यु, पढ़े क्या है वह बीमारी

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गरियाबंद. जिले के सुपेबेड़ा सहित 9 गांव के लोगों ने सरकार से इच्छा मृत्यु देने की गुहार लगाई है. दरअसल इन गांवों में बड़ी संख्या में ग्रामीण किडनी की गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हैं और इसकी वजह है दूषित पानी. वहीं प्रशासन की अनदेखी से परेशान ग्रामीण अब इच्छा मृत्यु की मांग कर रहे हैं.

दरअसल सुपेबेड़ा समेत 9 गांवों में पानी इतना दूषित हो गया है कि उससे बीमारियां फैल रही हैं. जांच में पता चला है कि इन गांवों के पानी में हैवी मेटल और फ्लोराइड की मात्रा तय मानक से काफी ज्यादा है. जिसकी वजह से इस पानी को पीने से लोगों की किडनियां खराब हो रही हैं. बीमारियों के चलते इन गांवों में लोगों की अकाल मृत्यु हो रही है.

सुपेबेड़ा गांव में दूषित पानी से होने वाली बीमारियों के चलते अब तक 76 लोगों की मौत हो चुकी हैं. वहीं 200 से ज्यादा लोग गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं. इन गांवों में मौतों और बीमार लोगों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है. प्रदेश और केन्द्र सरकार की एजेंसियों ने इन गांवों में बीमारियों की प्रमुख वजह दूषित पानी को बताया है.

ग्रामीण सरकार से साफ पीने के पानी की व्यवस्था उपलब्ध कराने की सालों से मांग कर रहे हैं. लेकिन अभी तक लोगों की यह मांग पूरी नहीं हुई है. जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है. यही वजह है कि अब ग्रामीण प्रशासन से अपने लिए इच्छा मृत्यु की मांग करने को मजबूर हो गए हैं.

ग्रामीण गुरुवार को अपनी समस्या को लेकर सीएम से मिलने पहुंचे थे लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया. इसके बाद ग्रामीण जैसे-तैसे गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू के पास पहुंचे लेकिन गृह मंत्री की बातों से ग्रामीण संतुष्ट नजर नहीं आए. अब नाराज ग्रामीणों ने सरकार के एक सप्ताह में पेयजल की समस्या दूर करने की मांग की है. वरना ग्रामीणों ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है.

बता दें कि सरकार ने ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये के ट्रीटमेंट प्लांट लगाये है लेकिन तेलनदी से शुद्व पानी लाने के लिए पाईप लाईन बिछाने का काम अभी तक पुरा नहीं हो पाया है. जिससे ग्रामीणों मे सरकार के प्रति काफी नाराजगी है.

एक ग्रामीण त्रिलोचन सोनवानी ने बताया कि पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एवं वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी गांव का दौरा किया था. उस वक्त उन्होंने सत्ता में आने पर पीड़ित परिवारों को 5-5 लाख रुपए का मुआवजा और एक परिजन को नौकरी देने की बात कही थी. लेकिन इतना समय बीत जाने के बाद भी उन्होंने अपना वादा पूरा नहीं किया है.

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