धान के कटोरा में रहने वाले अन्नदाताओं की इतनी इज्जत है कि मेहनत से पैदा किये गए धान खुले में सड़ गए

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बिलासपुर.मोपका के धान संग्रहण केंद्र में जहां लाखो क्विंटल धान बारिश में भीगते और अस्त-व्यस्त पड़े हैं। जिम्मेदार अफसर कह रहे कि अव्यवस्था के चलते इस साल इस केंद्र को बंद कर दिया गया है, तो क्या जो धान रखा है उसे बचाने की जिम्मेदारी किसी की नही। क्या मेहनत से अन्न उगाने वाले किसानों के परिश्रम का एसी चैम्बर में बैठने वाले अफसरो की नजर में कोई मोल नहीं है।

पिछले 3-4 दिन से मौसम खराब है। बुधवार की रात से लेकर गुरुवार को दोपहर तक सावन-भादो की तरह जोरदार बारिश हुई। यहाँ खुले आसमान के नीचे पिछले साल का रखा लाखो क्विंटल धान भीगता और अस्त व्यस्त परिसर में पड़ा रहा। रखरखाव का इंतजाम न होने के कारण यहाँ भंडार कर रखें गए धान की हालत बेहद खराब है। कुछ ढेरियों पर पालीथिन के कवर लगे है, तो ज्यादर वैसे ही खुले पड़े है। बारदाने फटने के कारण पूरे परिसर में किसानों द्वारा मेहनत से उपजाया गया धान बिखरा पड़ा है।

न जिला प्रशासन को इसकी पीड़ा है और न ही जिला विपणन विभाग के अफसरों को। विभागीय मंत्री बयान भांज रहे कि यदि बारिश से धान खराब होता है तो सम्बंधित समितियां जिम्मेदार होंगी पर होगा क्या सबको पता है।

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