सफलता की कहानी : जुनून, जज़्बे और बुलंद हौसले की बदौलत यशोदा टोप्पो ने बनाई अपनी अलग पहचान, गांव की महिलाओं को भी किया आत्मनिर्भर

1 min read

यशोदा टोप्पो एक बहुत गरीब परिवार से 19 वर्ष की उम्र में शादी हो कर ग्राम करहीकछार (बेलगहना) गांव में एक आदिवासी गरीब परिवार ही आई। गरीबी से हालात बहुत तंग थे परंतु जुनून और जज्बा बहुत बुलंद था। कुछ कर गुज़र जाने की लालशा हमेशा तूफान की लहर की तरह उठते रहती थी। कई बार गरीबी ने ऐसा इम्तहान लिया कि पालन करके अन्यत्र खाने कमाने जाना पड़ा परंतु मन में एक टीस थी कि जिंदगी ऐसे कब तक चलेगी और एक दिन फैसला लिया कि अब कुछ कर गुज़रना है और रोजगार के अवसरों के तलाशने में कई लोगों से मिलना-जुलना, जानकारी लेने का प्रयास शुरू किया और एक दिन उनकी मुलाकात एक सामाजिक कार्यकर्ता अनिल बामने से हुई। उनके मार्गदर्शन में अपने ही गाँव के एक मोहल्ले की 12 महिलाओं को इक्कठा कर समूह बनाने की जुगत में लग गई और समूह बना लिया। समूह बनाकर 5 रुपये से बचत शुरू की धीरे-धीरे समूह में पूंजी इक्कट्ठा हो गई। उसके बाद तरल साबुन बनाने का व्यवसाय शुरू कर लिया। आज लगभग 1200 ग्रामीण परिवारों में उनका बनाया तरल साबुन उपयोग किया जा रहा है। उसके बाद आत्मबल और विश्वाश और बढ़ने लगा उसके बाद एक अपने ही गांव क्षेत्र में देखा कि महिलाएं माहवारी के दौरान दूषित कपड़े का उपयोग पैड के लिए करती है। जिससे महिलाओं किशोरी बालिकाओं में यौन जनित संक्रमण जैसे समस्या देखने को आती थी। यशोदा ने एक और कदम उठाया और अपने समूह की महिलाओं के सहयोग से सैनेटरी पैड बनाने की मशीन खरीद ली। जिससे आजीविका का साधन भी बना लिया और महिला और किशोरी बालिकाओं को सैनेटरी पैड बाजार से कम दाम पर गाँव में ही उपलब्ध करवाया। जिससे स्वस्थ्य की सुरक्षा भी होने लगी। यशोदा टोप्पो इतने पर ही नहीं रुकी। उन्हने पाँच गाँव की 60 महिलाओं की एक सहकारी समिति ( कॉपरेटिव) पंजीयन कराई और खुद के साथ 60 महिलाओं को रोज़गार देने में सफल हुई। आज उनके साथ 60 महिलाएं रोजगार कर रही है और स्वयं अपने समूह से एक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित कर लिया है। जिससे कई महिला समूहों को रोजगार संबंधी प्रशिक्षण उपलब्ध करा रही है।
यशोदा अपने इन रोजगार से लगभग 8 हजार प्रतिमाह आमदनी कर लेती है। यशोदा के इस कदम से कई महिलाएं और समूह प्रेरित हो रहे हैं साथ ही साथ आसपास के स्कूलों में भी सैनेटरी पैड और तरल साबुन उपलब्ध करा रही है। आज उनका व्यसाय ग्रामीण क्षेत्र में एक अनुकरणीय उदाहरण बन रहा है। उनका यह व्यवसाय और उत्पाद ग्रामीण और शहरी लोग भी पसंद कर रहे है, उनसे फुटकर और थोक विक्रयता के रूप मे लगभग 120 महिला समूह जुड़कर काम कर रहे है। यशोदा कहती है कि असली आज़ादी अब हुई है जब वो अपनी ग्राम पंचायत पंच के पद पर भी पदस्थ है और बहुत खुश महसूस करती है।

Copyright © All rights reserved. | CG Varta.com | Newsphere by AF themes.