कोरोना का टीका लगाने में फाइज़र-बायोटेक की वैक्सीन निभा रहीं अहम भूमिका

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दुनियाभर में कोरोना वैक्सीन लगाने की मुहिम तेजी से आगे बढ़ रही है. भारत सहित कई देशों में बड़े पैमाने पर लोगों को कोविड-19 का टीका लगाया जा रही है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने जानकारी देते हुए बताया कि अब तक दुनिया के कई देशों में एस्ट्राजेनेका, फाइजर-बायेएनटेक और कोविशिल्ड की 3 करोड़ से अधिक खुराक पहुंचाया जा चुका है. इन सभी वैक्सीन में से एक कोविशिल्ड वैक्सीन का उत्पादन भारत में किया जा रहा है. भारत ने अब तक कई देशों को यह वैक्सीन मुहैया कराई है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने फाइज़र-बायोटेक (Pfizer-BioNTech) वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए अपनी ओर से मंज़ूरी दी थी. कोरोना महामारी फैलने के बाद डब्लूएचओ की तरफ से किसी वैक्सीन को पहली बार मान्यता दी गई. डब्लूएचओ के इस फैसले से कई देशों के लिए रास्ते खुल गए और उन्हें वैक्सीन मुहैया कराई गई. डब्लूएचओ ने कहा कि फाइज़र-बायोटेक वैक्सीन पहली ऐसी वैक्सीन है, जिसे कोरोना महामारी के आने के बाद संगठन की ओर से इमरजेंसी इस्तेमाल की मंज़ूरी दी गई. डब्लूएचओ की वरिष्ठ अधिकारी मैरिएंगेला सिमाओ ने कहा, “कोरोना वैक्सीन की वैश्विक पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में ये एक बेहद ही सकारात्मक कदम है.”

भारत बायोटेक की वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल में तीसरा डोज भी दिया जाएगा. इस क्लीनिकल ट्रायल के लिए भारत बायोटेक को सेंट्रल ड्रग स्टैण्डर्ड कंट्रोलर आर्गेनाईजेशन की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमिटी से अनुमति मिल गई है. वैक्सीन के दूसरे चरण का ये एक्सटेंशन है. इसमे वैक्सीन की दूसरी डोज के 6 महीने बाद ये तीसरी डोज दी जाएगी. इसके बाद अगले 6 महीने तक इसका फॉलोअप किया जाएगा. इस ट्रायल में तीसरी डोज 6 माइक्रोग्राम की होगी. पहली और दूसरी डोज़ के बाद करीब 81% एफिकेसी मिलती है जो क्लीनिकल ट्रायल से सामने आया है. ऐसे में अगर तीसरी डोज दी जाए तो क्या एफिकेसी बढ़ेगी इस पर रिसर्च होगी. माना जा रहा है कि जल्द ही ट्रायल शुरू हो सकती है.

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