सरपंच और ग्रामीणों की आपसी लड़ाई के कारण रावण दहन में लगा ग्रहण, नहीं मना विजयदशमी

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बिलासपुर. पिछले दिनों पूरे भारत में बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व विजयादशमी धूमधाम से मनाया गया। कोरोना संक्रमण के कारण दो वर्षों से सभी त्योहारों में प्रतिबंध लग था। छूट मिलने के कारण त्योहार को लेकर बच्चों से लेकर बड़ों में भी काफी उत्साह था। शहर से लेकर ग्रामीण आँचलों में रामलीला का मंचन किया गया। हर तरफ दशहरा मनाने वालों के चेहरे में खुशी नजर आ रही थी। लेकिन बिलासपुर जिले के कोटा ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम मंझगांव के ग्रामीणों के चेहरे में निराशा रही। सरपंच और ग्रामीणों की आपसी लड़ाई के कारण आज तीन दिन बीतने के बाद भी रावण का दहन नहीं हो पाया है। रावण का पुतला बनवाकर गांव के स्कूल प्रागंण में अभी भी खड़ा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सरपंच पति व पंचों ने जानबुझकर गांव की पुरानी परंपरा को हमेशा के लिये बंद करने की योजना बनाई है। ग्रामीणों में इसे लेकर आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने सरपंच और पंचों से इस्तीफे की मांग की है। इधर सरपंच पति अर्जुन भगत का कहना हैं कि दशहरा मनाने  तैयारी पूरी कर ली गई थी, लेकिन ऐन वक्त में गांव के 30-40 युवकों द्वारा विरोध किया गया।जिनके भय के कारण रावण दहन का कार्यक्रम रद्द किया गया। उनके द्वारा मांग किया जा रहा था कि गांव में माता चबूतरा निर्माण के लिये ढाई लाख रूपये और भूमि पूजन तत्काल किया जाये। ग्रामीणों की मांग जायज है, लेकिन किसी धार्मिक कार्यक्रम और विकास कार्य के लिये राशि उपलब्ध कराना दोनों अलग-अलग मामले हैं। बहरहाल बैठक कर मामले को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है।


रामलीला का होता था आयोजन-ग्रामीणों ने बताया कि कोटा और बेलगहना के बीच में यह एकलौता गांव है। जहां हर वर्ष  रावण दहन और रामलीला का आयोजन किया जाता है। जिसे देखने के लिए सैकड़ों लोग आते है। कार्यक्रम के दिन गाँव में मेला जैसा माहौल रहता है। इस बीच पुलिस की भी मौजूदगी रहती है। सरपंच पति ने गांव की वर्षों पुरानी परंपरा को रद्द कर धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचा रहा है। गांव में रावण दहन कार्यक्रम रद्द होने से आस-पास के  ग्रामीणों में भी आक्रोश है।


अनजान नहीं है सरपंच- सरपंच के पति अर्जुन भगत ने बताया कि सरपंची का हमारा दूसरा कार्यकाल है। इससे पहले कभी भी इस तरह की स्थिति निर्मित नहीं होती थी। इधर ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच को अच्छी तरह से मालूम है कि दशहरा का पर्व गांव में धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन रामलीला का आयोजन भी किया जाता है। इसके बाद भी पर्व को मनाने के लिये वे तैयार नहीं है। ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरपंच खानापूर्ति करने अपने ही पंच के माध्यम से रावण का पुतला बनवाकर  जलाने का प्रयास किया। सरपंच जानबूझकर धार्मिक आस्था को कुचलने का प्रयास कर रहा हैं।


गांव में हुई बैठक-इस मामले को सुलझाने के लिए गांव वालों ने आपस में बैठक का आयोजन किया। जिसमें ग्रामीणों ने चंदा करके दशहरा पर्व मनाने की बात कही।

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