भाजपा महिला आरक्षण बिल के पक्ष में नहीं : रिजवी

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रायपुर. जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के मीडिया प्रमुख, मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम के पूर्व अध्यक्ष, पूर्व उपमहापौर तथा वरिष्ठ अधिवक्ता इकबाल अहमद रिजवी ने केन्द्र सरकार द्वारा पारित सी.ए.ए., एन.आर.सी. तथा किसान विरोधी बिल को भाजपा की दादागिरी बताते हुए इन उत्तेजक बिलों को वर्ग विशेष को चोट पहुंचाने वाला निरूपित किया है। उन्होंने कहा है कि ये सभी बिल गैरवाजिब है तथा देश के सद्भावपूर्ण माहौल को खराब करने का कुत्सित प्रयास भी है जिससे देश के विभिन्न वर्गों में भय व्याप्त है।  रिजवी ने कहा है कि भाजपा की केन्द्र सरकार में महिला आरक्षण बिल पेश करने में हीलाहवाला स्पष्ट दिखलाई दे रहा है। उपरोक्त सभी उत्तेजक बिलों के स्थान पर महिला आरक्षण बिल को पास कराना ज्यादा उपयुक्त होता जो वर्तमान परिवेश में महत्वपूर्ण साबित होता परन्तु भाजपा एवं संघ महिला आरक्षण के पक्ष में नहीं है।  रिजवी ने कहा है कि भाजपा एवं संघ पुरूष प्रधान दल एवं संगठन है तथा महिलाओं का साथ एवं रहनुमाई दोनों को बिल्कुल पसंद नहीं है। आर.एस.एस. एवं भाजपा ने किसी महिला को राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख पदों पर नहीं रखा जाता है। राष्ट्रीय सेवक संघ में तो महिला विंग ही नहीं है जिससे यह साबित होता है कि वे महिलाओं के उत्थान के पक्षधर नहीं है। सत्ताधारी भाजपा में तो आज तक किसी महिला को राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री के योग्य भी नहीं समझा। इन दोनों ने ही सार्वजनिक जीवन तथा संगठन में महिलाओं से दूरी ही बनाई है।  रिजवी ने कहा है कि आगामी 8 मार्च को महिला दिवस के अवसर पर केन्द्र सरकार लोकसभा एवं राज्यसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला महिला आरक्षण बिल पेश करें और साथ ही संघ एवं भाजपा भी अपने संगठनों में महिला आरक्षण को लागू करें। चूंकि भाजपा संघ के इशारे पर चलता है तो क्या महिला आरक्षण बिल पेश करने की हिम्मत भाजपा जुटा पाऐगी? क्योंकि संघ से इस बिल पर सहमति की उम्मीद करना नामुमकिन है। 

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