अमेरिकी बिजनेसमैन हुए किसान आंदोलन में शामिल

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पिछले सात महीने से ज्यादा समय से देश में किसान आंदोलन चल रहा है. देश-विदेश की कई जानी-मानी हस्तियों ने किसान आंदोलन को अपना समर्थन दिया है. पॉप स्टार रिहाना, मशहूर पर्यावरणविद ग्रेटा थनबर्ग के बाद अब अमेरिका में भारतीय मूल के प्रसिद्ध इनोवेटर और फिलनथ्रोपिस्ट गुरिंदर सिंह खालसा ने किसानों को अपना समर्थन दिया है. गुरिंदर सिंह 29 मार्च को सिंघु बॉर्डर पर किसानों के आंदोलन में भाग लेने पहुंचे थे. वे 30 मार्च को भी सिंघु बॉर्डर पर किसानों के समर्थन में मौजूद रहे. रोजा पार्क्स ट्रेबलाइजर अवार्ड से सम्मानित गुरिंदर सिंह खालसा इंडियानापोलिस में रहते हैं. वे अमेरिका में सिख पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (पीएसी) के चेयरमैन भी हैं. सोमवार को वे सिंघु बॉर्डर पर किसानों का पूरी तरह समर्थन किया और विवादास्पद तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की.

इससे पहले गुरिंदर सिंह ने संयुक्त किसान मोर्चा को पत्र लिखकर आंदोलन का समर्थन किया था. अपने पत्र में गुरिंदर सिंह ने लिखा था मैं गुरिंदर सिंह खालसा, पीएसी का चेयरमैन पूरी तरह से किसान आंदोलन का समर्थन करता हूं. वर्तमान में मैं भारत में हूं और निजी तौर पर मैं किसान आंदोलन में शामिल होकर अपनी भावना व्यक्त करना चाहता हूं. उन्होंने लिखा था कि मैं 29 और 30 मार्च को किसान एकता मोर्चा के आंदोलन में सिंघु बॉर्डर पर भाग लूंगा. सरकारी की मनमानी के बारे में बात करते हुए गुरिंदर सिंह ने बताया कि देश पर दक्षिणापंथ सरकार की पकड़ बहुत मजबूत है. विपक्ष बहुत कमजोर हो चुका है. वह अकेले दम पर सरकार की शक्ति को कुछ कम नहीं कर सकता. ऐसे में क्रांति ही एक रास्ता बचता है जिससे सरकार की मनमानी को रोका जा सकता है. अगर इस आंदोलन का सफल नहीं बनाया गया तो अगली क्रांति करने में बहुत समय लगेगा.

सिंघु बॉर्डर पर किसानों को संबोधित करते हुए गुरिंदर सिंह ने बताया कि पूरा प्रवासी भारतीय समुदाय इस आंदोलन पर बारीकी से नजर रखे हुए है. उन्होंने कहा कि मैं पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों के किसानों को धन्यवाद देना चाहूंगा कि उन्होंने सरकार को अपनी नीति वापस लेने के लिए इतने दिनों से इस आंदोलन को चलाया है. मैं देश-विदेश के उन भाइयों को भी धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने इस आंदोलन का समर्थन किया है और दिलो-दिमाग और धन से इस आंदोलन की सहायता की है. उन्होंने किसानों से अपील की, आप इस आंदोलन से पीछे नहीं हटें, आपकी सफलता बहुत करीब है. इसके अलावा गुरिंदर सिंह ने जोगिंदर सिंह तूर द्वारा लिखी गई किताब इस ‘कृषि कानून में काला क्या है’ की 10 हजार कॉपियां हिन्दी और पंजाबी में छपवाने के लिए आर्थिक मदद देने की घोषणा भी की.

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