बेसहारा कुत्तों को सहारा देने एनजीओ को दी जाएगी 5 हजार स्कवेयर फीट जमीन

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बिलासपुर. एमआइसी (मेयर इन काउंसिल) की बैठक विकास भवन के दृष्टि सभा कक्ष में महापौर रामशरण यादव की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में कुल 28 प्रस्तावों को पारित किया गया है। जिसमें शहर में बढ़ रहें बेसहारा कुत्तों के लिए एनजीओं को 5000 स्कवेयर फीट जमीन देने का प्रस्ताव पास किया गया। एनजीओं उस जगह में रख कर देखभाल कर सके। इसके साथ ही समाजिक सुरक्षा, वृद्धा पेंशन व वाटर हार्वेस्टींग का प्रस्ताव पास किया गया।

शहर में इन दिनों कुत्तों की संख्सा दिनों दिन बढ़ते जा रही है। आए दिन वाहनों से दुर्घटनाएं भी हो रही है। इसके साथ कुत्ते काटने की घटनाएं भी बढ़ गई है। ऐसे में एक एनजीओं द्बारा शहर के बेसहारा कुत्तो को सहारा देने के लिए जमीन की मांग की थी। जहां शहर के सड़को में घुमने वाले कुत्तों को पकड़ कर उस जगहा में रखा जा सकें। शुक्रवार की शाम 4 बजे विकास भवन के दृष्टि सभा में हुए मेयर इन काउंसिल में इसके लिए प्रस्ताव रखा गया। जिसमें एनजीओ को 5,000स्कवेयर फीट जमीन देने का प्रस्ताव पारित किया गया। इसके साथ ही एमआईसी में प्रस्ताव रखा गया कि बच्चों और बुजुर्गों के लिए शासन कई योजना चला रहा है। लेकिन इसके साथ युवा वर्ग पर भी विशेष ध्यान दिया जाना आवश्यक है। ऐसे में प्रस्ताव रखा गया कि शहर में ख्ोल के लिए नगर निगम द्बारा विशेष ध्यान दिया जाएग। जिसके लिए महापौर गोल्ड हॉकी और फुटबॉल कप के बजट को 15 लाख से बढ़ाकर 50 लाख कर दिया जाए. जिससे शहर के युवा वर्ग में खेल कूद के प्रति रूचि बढ़ेगी।

इसके तरह कुल 28 प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई। बैठक में सभापति शेख नजीरुद्दीन, नगर निगम आयुक्त अजय कुमार त्रिपाठी, एमआईसी सदस्य राजेश शुक्ला, अजय यादव, सीताराम जायसवाल,भरत कश्यप, संध्या तिवारी, पुष्पेंद्र साहू, बंजरंग बंजारे, सुनीता नामदेव गोयल, परदेशी राज, मनीष गढ़ेवाल, चीफ इंजीनियर सुधीर गुप्ता, अधीक्षण अभियांता द्बय जीएस ताम्रकार व निलोत्पल तिवारी, स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ओंकार शर्मा सभी जोन कमीश्नर, रेणुका पिग्ले उपस्थित रहे।

 जोन कमीश्नर को निर्देश ,चखना सेंटर वालों को दें नोटिस : शहर को स्वच्छ बनाने में सबसे बड़ा रोड़ा शराब दूकानों के आस-पास संचालित चखना सेंटर है। वर्तमान में शहर को 10 लाख से नीचे की आबादी में रहने योग्य शहरों की सूची में 7वां  स्थान मिला है। इसे और बेहतर करने के लिए सफाई पर ध्यान दिया जा रहा है। लेकिन चखना सेंटरों के आस- पास डिस्पोजल, पानी पाऊच और चिप्स, बिस्कूट के पॉलिथिन बिखरे रहते है। जिससे आस-पास की नालियां जाम हो रही हैं। साथ ही क्षेत्र में गंदगी पसरी रहती है। ऐसे में रैंकिग घटने की आशंका है। एमआईसी में सभी जोन कमीशनर को निर्देश दिया गया कि निगम के स्वास्थ्य विभाग के साथ मिल कर प्रत्येक जोन में कितने चखना सेंटर संचालित हैं। उसकी सूची बनाएं और निरीक्षण कर गंदगी पाए जाने पर उन्हें नोटिस जारी किया जाए।

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