राम मंदिर के नाम पर भाजपा चंदे का धंधा कर रही : भूपेश बघेल

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रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रविवार को भाजपा और केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। भगवान राम, राम मंदिर और किसान आंदोलन के मुद्दों को लेकर भाजपा निशाने पर रही। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा, भाजपा ने आजतक हिंदुओं के लिए क्या किया है। राम मंदिर के नाम पर भी चंदे का धंधा कर रही है। मुख्यमंत्री ने किसानों के आंदोलन और भारत बंद का समर्थन करते हुए नए कृषि कानून का विरोध जताया।

बालोद दौरे पर जाने से पहले मीडिया से बात कर रहे मुख्यमंत्री बघेल ने कहा, राम मंदिर निर्माण के नाम पर चंदा मांगने वाले पहले साल 92 में शिलान्यास से लेकर अब तक चंदे का हिसाब तो दें। मुख्यमंत्री ने कहा, भाजपा खुद को हिंदूवादी पार्टी कहती है। क्या किसान हिंदू नहीं हैं? क्या गरीब मजदूर तबके के लोग हिंदू नहीं हैं? क्या कुम्हार, बुनकर हिंदू नहीं हैं? आखिर भाजपा और केंद्र सरकार ने इनके लिए क्या किया?

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि भाजपा राम के नाम पर सिर्फ राजनीति करती है। राम के सबसे बड़े भक्त तो हमारे नेता महात्मा गांधी थे। जिनके मुख से मरते वक्त भी हे राम निकला। ये (भाजपा) क्या राम के विचारों और आदर्शों की बात करेंगे। उन्होंने कहा, राम भाजपा की बपौती नहीं हैं। राम जनमानस के प्रतीक हैं। राम छत्तीसगढ़िया संस्कृति में हैं। वे जन-जन के हैं और उनके हृदय में समाए हुए हैं।

वहीं बघेल ने नए कृषि कानून के विरोध जताते हुए कहा कि हम किसानों के साथ हैं। कहा, केंद्रीय कृषि कानून किसान विरोधी है। कृषि कानून को ‘कृषि वीर’ नाम दिया गया है। कहा जा रहा है कि ये किसानों के हित के लिए है, लेकिन ये पूंजीपतियों के लिए लाया गया है। ने कहा, किसानों की तो यही मांग है कि समर्थन मूल्य में खरीदी हो। इसके लिए नियम हों, फिर चाहे मंडी के अंदर खरीदी हो या बाहर।

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा, एक लाइन में साफ कर दिया जाए कि जो समर्थन मूल्य से कम में खरीदेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही राज्यों को एथेनॉल प्लांट लगाने की अनुमति देनी चाहिए। राज्यों पर छोड़ दें कि धान खरीदी के बाद अतिरिक्त का एथेनॉल बना सकें। इसके बाद सरकार पर भार नहीं पड़ेगा। वहीं दूसरे किसानों को उनकी उपज का मूल्य मिलेगा और पेट्रोलियम पदार्थों के अतिरिक्त खर्च बचेगा।

नए केंद्रीय कृषि कानून के विरोध में किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ हल्ला बोल दिया है। पंजाब से शुरू हुआ आंदोलन दिल्ली होते हुए अब छत्तीसगढ़ तक पहुंच गया है। एक ओर जहां किसान विरोध में प्रधानमंत्री का पुतला फूंक रहे हैं। वहीं तमाम किसान संगठनों ने 8 दिसंबर को भारत बंद का ऐलान कर दिया है। किसानों के भारत बंद के इस आह्वान को ट्रेड यूनियन के साथ कई दलों ने भी समर्थन दिया है।

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