यह बस्ती सरकार और पूंजीपतियों आँखों में गड रही है, इसीलिए तोड़ना चाहते है बस्ती : मिनीमाता बस्ती बचाओ संघर्ष समिति

1 min read

बिलासपुर. मंगलवार को मिनीमाता बस्ती बचाओ संघर्ष समिति द्व्रारा तालापारा के तालाब के पास पुनः धरना और बैठक रखा गया था. जिसमें समिति के सदस्यों ने अपनी-अपनी बात रखी. बैठक में साथी नरोत्तम ने कहा कि बगल में जो महल और मॉल है, उसके बीच में यह बस्ती सरकार की और पूंजीपति लोगों की आँख में गड रही है, इसीलिए बस्ती तोड़ना चाहते है.


बैठक में आंदोलन को समर्थन देने पहुँचे नंद कश्यप ने बोला कि एक तरफ मुख्यमंत्री कुपोषण से लड़ने की बात कहते है, तो दूसरे तरफ बार-बार गरीब बस्तियों को उजाड़ दिया जाता है, जिससे कुपोषण बढ़ेगा न कि घटेगा. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार तालाब के सौंदर्यीकरण के नाम पर लोगों को यदि हटा रहे है, तो सबसे पहले शहर के बाकी ज़मीनों को भी खाली करवाये जिन पर बड़े-बड़े लोगों के घर बने हुए है. साथी संजीत बर्मन, पिंटू व सुनील ने भी अपनी बात रखते हुए, आंदोलन का समर्थन दिया.

बैठक का संचालन कर रही प्रियंका शुक्ला ने बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि रायपुर से लेकर शहर तक में बड़े -बडे दफ्तर, राजनीति दलों के दफ्तर भी तालाब पर ही बने हुए है, उनको भी सरकार खाली करवाये पहले. यह सरकार भी पहले की सरकार के नक्शे कदम पर चल रही है, हमको सरकार से सीधा कहना पड़ेगा कि यदि हम कुर्सी दे सकते है, तो कुर्सी से उतार भी सकते है. हमको किसी से भी डरने की ज़रूरत नही है। आगे की रणनीति बनाते हुए यह तय किया गया कि भले सरकार के लोग व नेता हमसे संवाद करने से पीछे हट रहे हो, पर हम गांधीवादी ढंग से संवाद करेंगे और आंदोलन को तेज करेंगे व बस्ती में ही धरना और आंदोलन की तैयारी शुरु हो गयी है.

आंदोलन की जगह पर भोजन बनाकर खाना और रहने का प्रण किया
आने वाली 8/12/2020 को एक जनसुनवाई के तौर पर खुली चर्चा और संवाद के लिए जनता, नेता, प्रतिनिधि व अधिकारियों को आने का आग्रह किया जाएगा. साथ ही आज 4 से 5 तक मीडिया के साथियों से बातचीज और प्रेसवार्ता किये जाने का सुझाव भी आया, जिसे सबने स्वीकार करते हुए सहमति प्रदान की.

Copyright © All rights reserved. | CG Varta.com | Newsphere by AF themes.