बावरा मन का वर्चुअल वर्ल्ड “उमंग-20 : रविवार को भोपाल के सूफी-ग़ज़ल गायक जनाब आरिफ लतीफ़ खान की करिश्माई पेशकश

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बिलासपुर. बावरा मन का वर्चुअल प्रोग्राम “उमंग-20” आहिस्ता-आहिस्ता एक ऑनलाइन जलसे की शक्ल अख्तियार करता जा रहा है.  रविवार 11 अक्टूबर को शाम 7 बजे बावरा मन के फेसबुक पेज में परम्परागत गीत-गायन से हटकर सूफियाना कलाम और ग़ज़ल गायकी का ख़ुमार चढ़ेगा. भोपाल के विश्वविख्यात सूफी-ग़ज़ल गायक आरिफ लतीफ़ खान साहब* का सूफी और ग़ज़ल गायन का करिश्माई असर संगीत के आसमां को रूहानी गूँज से सराबोर कर देगा. बावरा मन के अध्यक्ष पी. रामा राव और सचिव राजेश दुआ ने बताया कि मूलतः भोपाल के बाशिंदे आरिफ लतीफ़ खान का ताल्लुक संगीत के मेवाड़ घराने से है. सूफीवाद और ग़ज़ल गायकी के उम्दा फ़नकार आरिफ खान ने बमुश्किल 8 बरस की उम्र से ही अपने वालिद जनाब अब्दुल लतीफ़ खान साहब से संगीत की शुरूआती तालीम हासिल की. बाद के वर्षों में उनकी गायकी को नये रास्ते मिलते चले गए और उन्होंने भोपाल आकाशवाणी और दूरदर्शन में सूफी-ग़ज़ल गायकी में अपना एक अलग मुकाम बनाया. देखते ही देखते खान साहब की गायकी के चर्चे हिन्दुस्तान की सरहद को लांघ गए. मुल्क के मुख्तलिफ़ शहरों के अलावा उनके सूफी कलाम और दिलकश ग़ज़लों ने आस्ट्रेलिया, दुबई, कुवैत और आबुधाबी में एक से बढ़कर एक पब्लिक शो किये और खूब वाहवाही बटोरी. आरिफ लतीफ़ खान साहब का मानना है कि हिन्दुस्तानी संगीत के साथ सूफीवाद और ग़ज़ल गायकी की सांगीतिक खूबसूरती में बेतरह इज़ाफ़ा हुआ. जज़्बात और अल्फाज़ का यह बेहतरीन अंदाज़ हर खास-ओ-आम की रुह पर जादुई असर करता है और सुनने वाली पूरी बिरादरी सूफी-ग़ज़ल की शाम की तलबगार बन जाती है. बावरा मन के दोनों पदाधिकारियों ने मौसिक़ी से आशिक़ी रखने वाली अवाम से रविवार को शाम 7 बजे, फेसबुक लाइव में सूफी-ग़ज़ल गायक जनाब आरिफ लतीफ़ खान की दिलकश और रसीले अंदाज़ की गायकी से वाबस्ता होने की दरख्वास्त की है.
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