आरोपित अपात्र सीईओ फारूकी को किसकी सिफारिश से पुनः रखा गया? : रिजवी

रायपुर. जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के मीडिया प्रमुख, मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम के पूर्व अध्यक्ष, पूर्व उपमहापौर तथा वरिष्ठ अधिवक्ता इकबाल अहमद रिजवी ने कहा है कि भाजपा शासनकाल में वक्फ संपत्ति की हेराफेरी कर वक्फ बोर्ड एवं सरकार को करोड़ों का चूना लगाने वाले लगभग तेरह वर्षों से पदस्थ सी.ई.ओ. पशु चिकित्सक साजिद अहमद फारूकी को हटा पाने में वर्तमान कांग्रेस सरकार भी असहाय सिद्ध हुई है। इससे यह सिद्ध होता है कि फारूकी के सर पर किसी दमदार कांग्रेसी का हाथ है जो बोर्ड की करोड़ों की सम्पत्ति की हेराफेरी को दरकिनार कर फारूकी जैसे दागदार अधिकारी को सहयोग कर रहा है। वह व्यक्ति की अल्लाह की राह में दी गई जमीनों की हेराफेरी करने वाले बोर्ड के पूर्व पदाधिकारियों को बचाने का गुनाह कर रहा है।
रिजवी ने बताया है कि वर्तमान कांग्रेस सरकार ने पशुपालन विभाग से जारी आदेश के अनुसार अन्यत्र विभागों में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ पशु चिकित्सकों की शासन की नीति एवं निर्देश के तहत गरवा और गौठान के रखरखाव एवं पशुओं की चिकित्सा के क्षेत्र में ज्यादा जरूरत है। परन्तु डा. फारूकी की दमदार सिफारिश के कारण उन्हें छोड़कर शेष सभी प्रतिनियुक्ति में पदस्थ अन्य पशु चिकित्सक वापस आ गए हैं। भूपेश सरकार बताए कि किसकी सिफारिश पर अपात्र आरोपित सी.ई.ओ. फारूकी को सरकार के निर्देश के विरूद्ध यथावत वक्फ बोर्ड में ही रखा गया है। हेराफेरी के आरोपी फारूकी को सी.ई.ओ. बनाए रखने से मुस्लिम समाज में रोष व्याप्त है तथा मुख्यमंत्री से मांग करते है कि भाजपा शासन काल में बोर्ड को करोड़ों का चूना लगाने वाले पदाधिकारियों को सलाखों के पीछे डाला जाए। आरोपियों की जांच में अप्रत्याशित विलम्ब ने विभागीय सचिव को शंका की परिधि में खड़ा कर दिया है।
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