आज है मुगल शहंशाह शाहजहां का जन्मदिन, जानिए उनकी ‘मुहब्बत’ मुमताज की मौत कैसे 14वें बच्चे को जन्म देने के दौरान हुई

आज ही के दिन 1592 में दुनिया में अपनी पाक और सच्ची मोहब्बत के लिए जाने गए मुगल बादशाह शाहजहां का जन्म हुआ था. 5 जनवरी 1592 ई में जोधपुर के शासक मोटा राजा उदय सिंह की बेटी जगत गोसाई (जोधाबाई) के गर्भ से महान शासक शाहजहां ने जन्म लिया था. शाहजहां को दुनिया के अजूबों में से एक ताजमहल के निर्माण के लिए जाना जाता है. दरअसल जब भी सच्ची मोहब्बत की बात की जाती है तो अनायास ही ताजमहल का जिक्र होने लगता है. सफेद संगमरमर के पत्थरों से बनी अत्यंत भव्य और शानदार ताजमहल की इमारत को शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में बनवाया था.

कहा जाता है कि, शाहजहां अपनी बेगम मुमताज महल को बेइंतहा मोहब्बत करते थे. लोग भी कहते थे कि किसी शौहर और बीवी में ऐसा पाक इश्क कभी नहीं देखा. दोनों को कुदरत ने 13 औलादों से नवाजा था. शाहजहां को एक पल भी अपनी बेगम मुमताज महल से दूर रहना बर्दाश्त नहीं होता था. यही वजह थी की 1661 के जून महीने में शाहजहां ने जहान लोदी पर जब चढ़ाई की थी तो वह मुमताज महल को भी अपने साथ ले गए. मुमताज उस समय गर्भवती थीं. इस दौरान लंबी यात्रा करने के कारण मुमताज महल थक कर चूर हो गई थीं. इसी का असर उनके गर्भ पर भी पड़ा और उन्हें दिक्कतें शुरू हो गईं. बताया जाता है कि मुमताज करीब 30 घंटों तक प्रसव पीड़ा से तड़पी थीं, और फिर 16 जून 1631 की रात अपने 14वें बच्चें को जन्म देते हुए मुमताज महल की दर्दनाक मौत हो गई थी. मुमताज की 14वीं औलाद बेटी थी. जिसका नाम गौहर आरा रखा गया.

जिस मुमताज से शाहजहां बेपनाह मोहब्बत करते थे उसकी मृत्यु होने से वे अंदर तक टूट गए थे. उन्होंने मुमताज की मौत के गम में पूरे साम्राज्य में शोक का ऐलान कर दिया था. कहा जाता है कि मुगल साम्राज्य तकरीबन दो वर्षों तक मुमताज की मौत में गमगीन रहा था.

मुमताज ने अपनी मौत से पहले शाहजहां से 2 वादे भी लिए थे. एक वादा था कि उनकी मौत के बाद वह निकाह नहीं करेंगे. और दूसरा वादा एक ऐसा मकबरा बनवाने का था जो सबसे अलग और खास हो.मुमताज जब जीवित थीं तो वह अक्सर आगरा में यमुना किनारे एक बाग में जाया करती थीं.शायद इसी वजह से शाहजहां ने मुमताज की ख्वाहिश को पूरा करने के लिए जब ताजमहल बनाने की सोची तो यमुना का किनारा ही चुना और उनकी याद में दुनिया के अजूबों में एक ताजमहल जैसी भव्य इमारत का निर्माण कराया. बताया जाता है कि मुमताज के शव को ताप्ती नदी के किनारे जैनाबाग में अस्थाई तौर पर दफन किया गया था. जिसे 12 साल बाद आगरा के निर्माणाधीन ताजमहल में दफन किया गया.

मोहब्बत की निशानी ताजमहल का निर्माण करीब 23 साल में हुआ था. हालांकि इस खास मकबरे का निर्माण कार्य 1643 में पूरा हो गया था लेकिन इसके ऐतिहासिक वास्तुकला और वैज्ञानिक महत्व के हिसाब से इसके निर्माण में 11 साल और लग गए. 1653 में यह इमारत पूरी तरह तैयार हुई थी. कहा जाता है कि ताजमल के निर्माण 20 हजार मजदूरों ने किया था. निर्माण कार्य पूरा हो जाने के बाद मुगल शासक शाहजहां ने सभी कारीगरों के हाथ कटवा दिए थे, ताकि ताजमहल जैसी कोई अन्य इमारत का निर्माण दुनिया न हो सके. इसी कारण ताजमहल दुनिया की सबसे अद्भुत अजूबों में से एक है.

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